नमस्ते दोस्तों
दुनिया राजनीति का एक बहुत बड़ा मंच है और दुनिया की राजनीति में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो पूरी दुनिया की राजनीति पर असर डाल देते हैं। भारत और अमेरिका का रिश्ता ठीक वैसा ही है। कभी इन दोनों देशों के बीच मित्रता नजर आती है तो कभी यह दूसरे के बीच नाराजगी देखने को मिलती है। वर्तमान में यह रिश्ता और भी महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आज दुनिया दो बड़े मोर्चों में बँटी हुई है एक तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी मुल्क और दूसरी तरफ रूस-चीन का गठजोड़। इस बीच भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और मज़बूत अर्थव्यवस्था के दम पर एक नई शक्ति बनकर उभरा है।
तो चलिए अमेरिका और भारत के रिश्ते को विस्तार से जानते हैं
The relationship between India and America is exactly like that. Sometimes friendship is seen between these two countries and sometimes resentment is seen between them. At present, this relationship has become even more important, because today the world is divided into two big fronts, on one side America and its allies and on the other side the alliance of Russia-China. Meanwhile, India has emerged as a new power on the strength of its independent foreign policy and strong economy.
So let’s know the relationship between America and India in detail
भारत-अमेरिका संबंधों की विस्तृत जानकारी
शुरुआती दौर (1947 – 1990)
भारत की ब्रिटिश हुकूमत से आज़ादी के बाद अमेरिका का झुकाव पाकिस्तान की ओर ज़्यादा था। शीत युद्ध (Cold War) के दौर में भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) का रास्ता चुना, लेकिन फिर भी सोवियत संघ (USSR) के क़रीब रहा। यही कारण था कि अमेरिका और भारत के रिश्ते उस समय ठंडे रहे।

After India’s independence from British rule, America was more inclined towards Pakistan. During the Cold War, India chose the path of Non-Aligned Movement, but still remained close to the Soviet Union (USSR). This was the reason why relations between America and India remained cold at that time.
नया मोड़ (1990 – 2005)

सोवियत संघ या USSR के 1990 में टूटने के बाद भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को सही दिशा में खोला और अमेरिका जैसे देश ने इसे नए नज़रिए से देखना शुरू किया और 2005 का भारत-अमेरिका परमाणु समझौता (India-US Nuclear Deal) रिश्तों में ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया था।
After the collapse of the Soviet Union or USSR, India opened up its economy and America began to look at it from a new perspective. The India-US Nuclear Deal of 2005 brought a historic turn in relations.
2010 से अब तक
पिछले एक दशक में भारत और अमेरिका ने रक्षा, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और रणनीति के क्षेत्र में एक दूसरे को सहयोग किया है। खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव ने अमेरिका को भारत का और नज़दीकी साथी बना दिया था!
In the past decade, India and America have cooperated with each other in the field of defense, technology, education and strategy. Especially the growing influence of China has made America a closer partner of India!
2025 में भारत-अमेरिका के बीच विवाद और चुनौतियाँ
1. व्यापार युद्ध
अमेरिका कहना हैं कि भारत अपना बाज़ार पूरी तरह खोल दे। जबकि भारत अपने स्टार्टअप्स, MSME और घरेलू उद्योगों की रक्षा करना चाहता है। दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात शुल्क (Tariffs) को लेकर बार-बार खींचतान बनी हुई हैं |

America wants India to open its market completely. Whereas India wants to protect its startups, MSME and domestic industries. There is a constant tussle between the two countries regarding import-export duties (Tariffs).
ट्रेड वॉर और टैरिफ़
- अमेरिका ने कई मंचो पर भारत को “टैरिफ किंग” कहा क्योंकि भारत इम्पोर्ट पर बहुत ज्यादा टैक्स लगाता है।
2. रूस और रक्षा सौदे
भारत अभी भी रूस से हथियार और सस्ता तेल खरीद रहा है। जिस कारण से अमेरीका का भारत पर आक्रोश हैं | अमेरिका रूस के खिलाफ सख्त है और चाहता है कि भारत भी उस पर दबाव बनाए। लेकिन भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर अडिग है। यह अमेरिका के लिए असहज स्थिति है।
our India is still buying arms lots and cheap oil from Russia in lots. Due to which America is angry with India. America is strict against Russia and wants India to put pressure on it too. But India is firm on its independent foreign policy. This is an uncomfortable situation for America.
लेकिन हमारा प्यारा भारत अपनी “Non-Alignment Policy” इसका मतलब स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखना चाहता है और किसी के दबाव में आकर अपनी निति ख़त्म नही करना चाहता।
3. मानवाधिकार और लोकतंत्र
अमेरिका की कई संस्थाएँ भारत में मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर सवाल उठाती हैं। लेकिन भारत इसे अपनी आंतरिक नीति में हस्तक्षेप मानता है। यह विवाद दोनों देशों के बीच बार-बार सामने आता है।
Many US organizations question the status of human rights and religious freedom in India. But India considers this an interference in its internal policy. This dispute arises repeatedly between the india & america.
4. डेटा और टेक्नोलॉजी पर तनाव
भारत ने कड़े डेटा प्रोटेक्शन कानून बनाए हैं ताकि विदेशी कंपनियाँ भारतीयों का डेटा खुलेआम इस्तेमाल न कर सकें। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों को यह नियम भारी लगते हैं।
India has made strict data protection laws so that foreign companies cannot freely use the data of Indians. Big American tech companies find these rules onerous.
5. वीज़ा और रोजगार का मुद्दा
- भारत के लाखो लोग अमेरिका में IT और मेडिकल सेक्टर में काम कर रहे हैं।
- वीज़ा पॉलिसी में सख्ती भारतीय युवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हैं |
- Lakhs of Indians are working in the IT and medical sectors in the US.
- Strictness in visa policy has become a big challenge for Indian youth.
6.रूस-युक्रेन युद्ध और भारत की पोज़ीशन
- अमेरिका चाहता है कि भारत रूस के खिलाफ सख्त कदम उठाए।
- लेकिन भारत रूस से डिफेंस खरीदना जारी रखता है।

- America wants India to take tough action against Russia.
- But India continues to buy defense from Russia.
भारत का कैदम
भारत अब पहले जैसा बात को सँभालने वाला देश नहीं रहा। वह अब स्पष्ट रूप से भारत की नीति पर चलता है।
- विवाद के बाद भी रूस से तेल ले रहा है |
- अमेरिका से टेक्नोलॉजी लेना जारी रखना |
- यूरोप से निवेश लेना व करना |
- चीन के खिलाफ़ मोर्चा लेना और अपनी बात रखना |
- Buying oil from Russia despite the dispute.
- Continuing to buy technology from America.
- Taking and making investments from Europe.
- Taking a stand against China and putting forward our views.
भारत हर जगह अपने हित के हिसाब से निर्णय ले रहा है। यही अमेरिका को कभी अच्छा लगता है |
अमेरिका का इच्छा
अमेरिका चाहता है कि हमारा भारत पूरी तरह उसके खेमे में आ जाए और खासकर चीन के खिलाफ़ हो। लेकिन भारत किसी का कठपुतली बनने को तैयार नहीं हैं । यही वजह है कि अमेरिका अक्सर Pressure + Partnership की पॉलिसी अपनाता है।
America wants our India to be completely in its camp and especially against China. But India is not ready to become anyone’s puppet. This is the reason why America often adopts the policy of Pressure + Partnership.
