सूरज(sun) – जीवन का एक स्रोत
अगर सच कहु तो दोस्तों जीवन का मूल स्रोत सूरज ही है। क्योकि मौसम पर्यावरण खाना पीना रहना यह सब सूरज के कारण ही समफव सोचें तो धरती पर जो कुछ भी चल रहा है – हमारी साँसें, खाना, पानी, मौसम – सबका असली स्रोत सिर्फ़ एक है, और वो सूरज है।
सूरज हमारे लिए ज़रूरी क्यों है?
दोस्तो अगर हम कल्पना करे की सूर्य इस ब्रह्मांड मे है ही नही तो आप क्या क्या सोच सकते है हमारे मन मे सबसे पहले पहले यही ख्याल आएगा कि ना तो धरती पर रोशनी होगी और ना ही कोई दिन और रात में परिवर्तन केवल होगा तो आधार अंधेरा और अंधकार इसके अलावा कुछ नहीं होगा केवल हम यहीं तक सीमित नहीं रह सकते अगर सूर्य नहीं है तो उन्हें कोई जीवन है और ने ही कोई संसार का अस्तित्व क्योंकि पूरा संसार पूरा ब्रह्मांड केवल सूर्य के ऊपर ही निर्भर है अगर सूर्य अपनी रोशनी देना बंद कर दे और अगर सूर्य एक बार करने की पूरा गायब हो जाए तो पूरा ब्रह्मांड देश हो जाएगा आप बस इतनी कल्पना कर सकते हो कि अगर सूर्य एक सेकंड के लिए भी गायब हो जाए तो पृथ्वी में जब हम यहां पर खड़े हैं तो कोसों दूर जाकर करेंगे पूरी पृथ्वी में विस्फोट हो जाएगा और पूरी जिंदगी पूरा मनुष्य जीवन समाप्त हो जाएगा।
बिना सूर्य की रोशनी के क्या संभव नहीं है
- अगर सूर्य की रोशनी धरती पर नहीं पहुंच पाए तो ने तो कोई पेड़ पौधे उगेंगे ने कोई खाना मिलेगा और नहीं इस संसार में कोई इंसान जीवित बच पाएगा क्योंकि सब कुछ रोशनी पर ही निर्भर है
- फोटोसिंथेसिस को पेड़ पौधे अपना खाना बनाते हैं और उसी से ऑक्सीजन बनता हैं और उनसे हमें भोजन प्राप्त होता है
- अगर सूर्य की रोशनी पृथ्वी पर नहीं आएगी तो वहां पर गर्मी नहीं होगी और वाष्पीकरण नहीं होगा जिससे बारिश भी नहीं होगी
- सूरज की रोशनी से सोलर पैनल चलते हैं और मनुष्य को शरीर में भी विटामिन डी सूर्य की किरणों से प्राप्त होता है
सूरज क्या हैं?

अगर हम इसे अपनी आसान भाषा में कहे तो सूर्य एक बहुत बड़ा और विशाल गरम गोला है जिसमें विभिन्न प्रकार की गैस है सम्मिलित हैं उसमें ज्यादातर और मुख्यत हाइड्रोजन और हीलियम जैसी गैसे हैं सम्मिलित हैं उसमें ज्यादातर हाइड्रोजन और हीलियम जैसी कैसे हैं सूर्य एक बहुत ही गर्म और बड़ा तारा है सूर्य के भीतर न्यूक्लियर परमाणु जैसे रिएक्शन होते रहते हैं जिससे कि वहां पर आए दिन विस्फोट होते हैं जिस कानून से वह और भी ज्यादा गर्मी निकलती है और रोशनी भी।
सूर्य का तापमान आमतौर पर 15 मिलियन °C के लगभग (15 लाख डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा) गर्म रहता हैं !
सूरज और विज्ञान का संबंध
खाट कहीं वर्षों से वैज्ञानिक सूर्य को और भी गहराई से समझने के लिए कहीं मिशन पर काम कर रहे हैं कहीं मिसाइल चला रहे हैं। विश्व भर की बहुत सारी स्पेस एजेंसी या जैसे नासा इसरो इत्यादि बहुत ही जोरों शोरों से कम कर रहे हैं सूर्य को और गहराई से और नजदीक से रखने के लिए उसमें क्या है उसमें क्या कुछ कैसे है यह सब जानने के लिए वह आए दिन मुझे लॉन्च करते रहते हैं ताकि सूर्य का और अच्छी तरीके से अध्ययन कर सके।

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ISRO का Aditya L1 मिशन
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NASA का Parker Solar Probe

यह दोनों मिशन वह है जो लगातार सूर्य के पास जाते जा रहे हैं और जैसे-जैसे सूर्य के नजदीक जा रहे हैं वैसे ही वहां से फोटो और उसकी गर्मी को ट्रेस करके धरती पर या अपने घर पर भेज रहे हैं जो की विज्ञान में बहुत ही मददगार साबित होगा सूर्य का ताप उसकी गर्मी और उसको नजदीक से देखने के लिए इन मिशन को लांच किया गया था। इसका एक मुख्य उद्देश्य यह भी है कि सूर्य के फटने वाले तूफान का असर धरती की इंटरनेट और सेटेलाइट पर कैसे पड़ता है उसकी जानकारी लेना।
भारतीय संस्कृति में सूरज का महत्व
भारत में सभी लोग सूरज को बहुत पुराने समय से सूर्य देव के नाम उसे जानते आ रहे हैं। जिस कारण से पूरे भारतवासी इन विभिन्न नाम से विभिन्न अवसरों पर उनकी पूजा करते रहे हैं और कहीं व्यायाम के नाम भी रखे हैं जैसे सुबह सूर्य नमस्कार करना।।
सूर्य अपने में ही एक बहुत बड़ा महत्व रखता है क्योंकि समस्त भारतवर्ष अपने पूर्वजों के समान मानते आ रहे हैं इन्हें अपना देवता मानकर पूजते आये हैं।
सुबह का सूर्य नमस्कार
छठ पूजा
और दिन की शुरुआत सूरज को जल अर्पित करके करना
ये सब दिखाता है कि इंसान ने हमेशा सूरज को शक्ति और जीवन का प्रतीक माना है।

सूर्य की आवाज
सूर्य केवल रौशनी ही नही देता बल्कि वह बहुत तेज की आवाज में गूंजता भी हैं आप मानोगे नही मित्रो सूरज के अन्दर गैसों और नेवक्लियर धमाको से ऐसी बहुत तेज साउंड वेव्स निकलती हैं जिनका सीधा सीधा अशर हमारे अर्थात इन्सोनो के काम सीधा नही सुन पता उसकी धवनी इतनी तेज होती ह की अगर सीधी सुने दे तो इंसानों के कानो के पर्दे फट जाए |
हमारे और विश्व भर के वैज्ञानिकों ने जब इन तरंगों का मशीनों के जरिये शोध किया तो पाया की यह आवाज़ बिल्कुल डरावनी भुतिया मूवी जैसी निकलती हैं |
NASA ने सूर्य से निकलने वाली ध्वनी को सोलर साउंड नाम से बताया है | आप यही से अनिमान लगा सकते हो की सूर्य हमसे कितना दूर हैं पर उसकी धडकनों की आवाज को हम यह पर महसूस कर सकते हैं |
अस्थिर सूर्य
कभी आपके दादा या दादी से बचपन में सुना होगा की सूर्य एक ही जगह टंगा हुआ है और जो प्रथ्वी हे वे उसके चारों ओर घूमती है। लेकिन असलियत कुछ ओर ही है और असलियत यह है की सूरज भी लगातार घूम रहा है और हमारी प्रथ्वी भी घूम रही है । सूरज हमारी पियरी Galaxy के बिच के चारों तेजी से ओर लगभग लगभग 8,28,000 किमी प्रति घंटे की स्पीड से घूम रहा है। इतना ही नहीं बल्कि सूरज अपनी धुरी पर भी बहुत तेजी से गुमता है, वैज्ञानिकों के अनुसार सूरज को आकाशगंगा का एक चक्कर पूरा लगाने में लगभग करीबन 22-25 करोड़ साल के पास लगते है । इसका मतलब यह है की जब सूरज ने पिछली बार मिल्की वे के पूरा चक्कर लगाया था तब धरती पर डायनासोर निवास कर रहे थे।
विशाल सूरज
आप जो सूर्य को देख रहे हो वो लगभग हमारी प्र्थ्बी से लगभग 13X बड़ा है अगर हम इसकी तुलना करे तोह हम माने की सूर्य एक फूटबोल है तोह उसके सामने प्रथ्वी एक मटर का दाना है
